श्रीमती सारिका शर्मा ‘वृंदा’ एक अध्यात्मिक भावभूमि से जुड़ी, संवेदनशील और सृजनशील लेखिका हैं, जिनकी रचनाओं में भक्ति, प्रेम और जीवन के विविध आयाम गहराई से मुखर होते हैं।
आपका स्थायी निवास गाँव बड़ौना कलां, पंचकूला, हरियाणा में है। आपके पति का नाम श्री कृष्ण शर्मा है।
आपकी माता श्रीमती संतोष शर्मा जी ने कृष्ण भक्ति का बीज आपके हृदय में बोया, वहीं पिता श्री भगवत स्वरूप शर्मा जी की लेखन में रुचि ने आपको लेखन की ओर आकर्षित किया।
अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर एवं बी.एड उपाधि प्राप्त करने के पश्चात आप वर्तमान में ओमान में एक अंग्रेज़ी अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा और साहित्य का यह संगम आपकी लेखनी को एक विशेष ऊँचाई प्रदान करता है।
आप स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं और आपकी रचनाएँ क्षणिकाओं, छंदमुक्त कविताओं, आध्यात्मिक पदों, लघु कथाओं, सामाजिक विषयों पर आधारित पूर्णिकाओं, आलेखों तथा निबंधों के रूप में विभिन्न विधाओं में सृजित होती हैं।
आपकी कविताओं में आत्मा की पुकार और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पण की भावना अत्यंत सहज और गहन रूप से प्रकट होती है।
आपकी रचनाएँ साहित्य सृजनकारी मंच के साझा संकलनों "सुरभित कलियाँ", "भावनाओं के रंग" तथा "जोहर दर्पण" पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी हैं।
आप अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल, जबलपुर, जोहर दर्पण मंच तथा प्रतिलिपि लेखक मंच की सक्रिय सदस्य भी हैं।
रुचियाँ~
पढ़ना, योग करना तथा आध्यात्मिक विषयों पर लेखन करना।