शिवम दुबे 'रावण' एक संवेदनशील कथाकार और शब्दों के जादूगर हैं, जिनकी कलम इंसानी भावनाओं की सबसे गहरी परतों को छूने का हुनर रखती है। जीवन की छोटी-छोटी बातों में छिपे बड़े अहसासों को वे अपनी कहानियों में इस तरह पिरोते हैं कि पाठक खुद को उन पन्नों में कहीं न कहीं ज़रूर पा लेता है।
'रावण' नाम उनके व्यक्तित्व की दोहरी परतों का प्रतीक है— एक तरफ विद्रोही विचार, जो सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हैं, और दूसरी तरफ एक कोमल हृदय, जो प्रेम, अपनापन और रिश्तों की नमी को सँजोए रखता है।
"कुछ न कहो" उनकी कल्पना और अनुभव का सुंदर संगम है— एक ऐसी कहानी, जो बताती है कि ख़ामोशियों में भी एक पूरी दुनिया बस सकती है।