डॉ. चन्द्रकला भागीरथी

सभी लेखकों की अपनी विचारधारा। तभी तो साहित्य को कसौटी पर उतारा। साहित्य समाज का दर्पण कहलाया। हर लेखक का जीवन इसी में समाया।।

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

डॉ. चन्द्रकला भागीरथी जी का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर तहसील के गांव जीतपुर में हुआ। मात्र छह माह की आयु में उनकी माता रतनो देवी उन्हें धामपुर ले आईं, जहाँ उनके पिता शेर सिंह धामपुर शुगर मिल में कार्यरत थे। परिवार के साथ ही इनका बचपन और शिक्षा का आरंभिक काल धामपुर में ही व्यतीत हुआ।

शिक्षा

चन्द्रकला जी ने प्राथमिक, माध्यमिक और ग्रेजुएशन की शिक्षा धामपुर में प्राप्त की।
● हाईस्कूल – 1980 (द्वितीय श्रेणी)
● इंटरमीडिएट – 1990 (द्वितीय श्रेणी), कन्या इंटर कॉलेज, धामपुर
● विवाह के बाद पुनः शिक्षा आरंभ कर 2000 में बी.ए. पूर्ण किया
● 2002 में एम.ए. प्रथम श्रेणी से पूर्ण
● 2017–2022: पीएच.डी., हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, गढ़वाल, उत्तराखंड

व्यक्तिगत जीवन

1991 में इनका विवाह डॉ. मलखान सिंह से हुआ। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई कुछ समय के लिए रुक गई, लेकिन पति के सहयोग से शिक्षा पुनः शुरू की। इनके दो पुत्र हैं – राहुल कुमार और भुवनेश्वर कुमार

शिक्षण कार्य

● 2008–2010 : इंटर कॉलेज में हिंदी एवं संस्कृत अध्यापिका
● 2012–2020 : एस.बी.डी. महिला महाविद्यालय में प्राइवेट प्रवक्ता
● इसी अवधि में लेखन प्रवृत्ति प्रबल हुई और कक्षा के कार्यक्रमों व मंचों पर रचनाएँ प्रस्तुत की जाने लगीं।

साहित्यिक सफर

कोरोना काल में ऑनलाइन साहित्यिक मंचों से जुड़कर इन्हें व्यापक पहचान मिली। एकल काव्यपाठ, संचालन और विभिन्न मंचों पर प्रस्तुतियों से इनकी साहित्यिक ऊर्जा व शैली खूब सराही गई। अब तक इनकी 1000+ रचनाएँ देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

वैदिक प्रकाशन के साथ जुड़ाव

2023 में प्रशस्ति सचदेव जी के संपर्क में आने के बाद वैदिक प्रकाशन से इनकी एकल व संपादित पुस्तकों का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। इनके अनुसार प्रशस्ति जी का व्यवहार और साहित्य के प्रति लगाव अत्यंत प्रेरक रहा।

एकल प्रकाशित पुस्तकें

संपादित पुस्तकें

ऑनलाइन प्रकाशित पुस्तकें (सापिजन एप, मध्य प्रदेश)

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाँ

● 2016 से आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर कहानियों का प्रसारण
● 12 सेमिनारों में शोध पत्र/आलेख एवं सम्मान
● 100+ साझा संकलनों में सहभागिता (2–10 रचनाएँ प्रति संकलन)
● स्टेज पर सक्रिय कविता पाठ
● लेखन विधाएँ: गीत, कविता, मुक्तक, हाइकु, दोहे, ग़ज़ल, कहानी, लघुकथा, आलेख, उपन्यास, निबंध, संस्मरण आदि
● अन्य रुचियाँ: गायन, नृत्य, चित्रकला, समाज सेवा

समापन

ये अनमोल जीवन जो मिलता नहीं दुबारा, इसे चन्द्रकला भागीरथी जी ने लेखन द्वारा संवारा।।

डाॅ चन्द्रकला भागीरथी
धामपुर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश